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Mystery of Shambhala: आखिर क्या है कल्कि 2898 मूवी के शम्भाला का रहस्य

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Mystery of Shambhala आज मैं आपको शम्भाला शहर के बारे में बताऊंगा जो की आज एक रहस्य बना हुआ। हाल ही में आयी मूवी कल्कि में शम्भाला शहर के बारे में बताया गया है। आज मैं इसी शहर शम्भाला का रहस्य के बारे में आपको बताऊंगा। शम्भाला का रहस्य से जुडी सभी तथ्यों को समझाऊंगा।

शम्भाला का रहस्य (Mystery of Shambhala)

साल 2013 में रिसर्चर की एक टीम तिब्बत पहुंची थी जहा उन्होने इतिहास और पुरातात्विक अवशेषो की जांच शुरू किया था इसी दौरान उनका ध्यान एक भूले बिसरे साम्राज्य पर ध्यान जाता है जिसे गुगे किंगडम के नाम से जाना जाता है। यह साम्राज्य लगभग 1 लाख लोगो का घर था। लेकिन 1 रात में ऐसा क्या हुआ की ये 1 लाख लोग अचानक से गायब हो गए।

Mystery of Shambhala

शम्भाला का रहस्य विज्ञानं के लिए ये घटना सदियों से एक पहेली बानी हुई है। कुछ कहानिया इस रहस्यमयी घटना को एलियन से जोड़ती है। यह साम्राज्य 13वी शदाब्दी के दौरान बसाया गया था। एक बर्फ से ढकी बंजर जगह पर जहा पर किसी की भी जीवित रहने की उम्मीद नहीं थी। समय बीतता गया और 15वी शदाब्दी तक यह स्थान धन वैभव से भर गया।

जिस राज्य में 10 हजार लोग भी नहीं होने चाहिए थे वो स्थान 1 लाख से भी ज्यादा लोगो से भर गया। जब अन्य साम्राज्य के सम्राट गुगे के राजा पूछते की उन्होंने इतना अद्भुद और समृद्ध साम्राज्य कैसे बनाया तो गुगे साम्राज्य के लोग इसका श्रेय हमेशा शम्भाला नगरी को देते थे। उनका कहना था की हम जो कुछ भी है शम्भाला नगरी के मदद की वजह से है।

ये शम्भाला नगरी वही नगरी है जिसे हिन्दुओ और बौद्ध धर्म में देवताओ का निवास स्थान माना जाता है। लेकिन सन 1673 में लद्दाख के राजा ने इस साम्राज्य पर हमला कर दिया। सुबह जब अपनी सेना से हमला करवाया तो उसके सामने एक अजीब दृश्य था। पूरी नगरी खली थी। 1 लाख से भी ज्यादा लोग अचानक कहा गायब हो गए। यह सवाल आज भी रहस्य बना हुआ है।

सैनिको का ध्यान महल के अंदर मौजूद उन सुरंगो पर गया जो धरती के अंदर लगभग 2 से 3 किलोमीटर तक फैली हुई है। गुफाओ के पास हलचल के कई निशान थे जिससे यह साफ़ था की हाल ही में काफी गतिविधिया हुई थी। ये सुरंगे टूट चुकी थी फिर भी अंदर जाने की कोशिश की गयी थी लेकिन किसी को कुछ भी नहीं मिला था।

आखिरकार उनकी खोजबीन उन्हें उन सुरंगो तक ले गयी जो कैलाश पर्वत की ओर जाती थी कैलाश पर्वत जिसे भगवान् शिव का निवास स्थान माना जाता है और शम्भाला का प्रवेश द्वार भी माना जाता है। जो आज तक विज्ञानं और रहस्य का केंद्र बना हुआ है।

Mystery of Shambhala

शम्भाला का परिचय

हिमालय की बर्फीली और दुर्गम चोटियों के बीच छिपा हुआ एक ऐसा रहस्यमय स्थान जो सदियों से खोजकर्ताओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस स्थान का नाम शम्भाला है। शम्भाला एक पौराणिक शहर है जिसे ज्ञान शांति और उन्नत सभ्यता का का केंद्र मन जाता है। इस रहस्मय स्थान को ज्ञानगंज सिद्धाश्रम या शांग्रीला के नाम से भी जाना जाता है।

इस शहर को ढूंढ पाना बिलकुल भी आसान नहीं है आधुनिक तकनीकी मैपिंग और नेविगेशन सिस्टम भी इसके रहस्य को अभी तक सुलझा नहीं पायी है। हमारे महाकाव्यों में वर्णित सभी अमर जैसे हनुमान और अश्वथामा कहा जाता है की आज भी शम्भाला में निवास करते है। शम्भल के निवासियों के पास असाधारण बुद्धि और अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी है।

शम्भाला का उल्लेख प्राचीन धार्मिक ग्रंथो में होता है तिब्बती बौद्ध धर्म के काल चक्र तंत्र से लेकर हिन्दू धर्म के पुराणों तक यह स्थान ना केवल एक पवित्र धरोहर है। बल्कि एक आध्यात्मिक आदर्श भी है। कहते है की शम्भाला तक पहुंचना आसान नहीं है। यह रहस्मयी शहर केवल उन्ही लोगो के लिए खुलता है जिनके हृदय शुद्ध और आध्यात्मिक चेतना उच्चतम स्तर पर होती है।

शम्भाला का रहस्य इस शहर का जिक्र तिब्बती बौद्ध धर्म और हिन्दू धर्म सहित कई प्राचीन ग्रंथो में वर्णन है। तिब्बती बौद्ध धर्म के कालचक्र तंत्र और जंग संस्कृति में भी इसका जिक्र मिलता है की शम्भाला में ही कल्कि अवतार का जन्म होगा। जो कलयुग का अंत करके धर्म की पुनः स्थापना करेंगे।

शम्भाला और बौद्ध धर्म का सम्बन्ध

तिब्बती बौद्ध धर्म में शम्भाला का एक विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्त्व है इसे एक दिव्या नगरी माना जाता है। जो आध्यात्मिक शांति करुणा और ज्ञान का प्रतिक है। बौद्ध धर्म क सबसे महत्वपूर्ण ग्रंथो में से एक कालचक्र तंत्र में इसका उल्लेख देखने को मिलता है। कालचक्र तंत्र तिब्बती बौद्ध धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रन्थ है।

शम्भाला का रहस्य Mystery of Shambhala

हिन्दू धर्म और शम्भाला का सम्बन्ध

अब जानते है की हिन्दू धर्म में शम्भाला का क्या उल्लेख मिलता है। हिन्दू धर्म में शम्भाला का गहरा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्त्व है इसे एक पवित्र नगरी माना जाता है जहा भगवान् विष्णु के अंतिम अवतार कल्कि प्रकट होंगे। श्रीमद भगवत पुराण विष्णु पुराण महाभारत मत्स्य पुराण जहा पर भगवान विष्णु के दसवे अवतार कल्कि के प्रकट होने का उल्लेख मिलता है।

हिन्दू धर्म में ऐसी मान्यता है की कल्कि अवतार का जन्म शम्भाला में होगा। और वे राक्षस कली का अंत करके बुराइयों को समाप्त करेंगे। जिसके बाद सतयुग या कल्कि युग की शुरुआत होगी। धार्मिक ग्रंथो के अनुसार कलयुग की अवधि 4 लाख 32 हजार वर्षो की है और अभी इसका प्रथम चरण चल रहा है। जब कलयुग का अंतिम चरण आएगा तब भगवान विष्णु कल्कि अवतार में प्रकट होंगे।

शम्भाला की खोज

शम्भाला को खोजने के इतिहास में कई साहसी यात्राएं और रिसर्च की गयी लेकिन इनमे कोई भी खोज पूरी तरह से सफल नहीं हो पायी। हलाकि कुछ खोजकर्ताओं ने शम्भाला की रहस्मई झलक देखे जाने का दावा किया है। इन अभियानों में हिमालयो की दुर्गम चोटियों और तिब्बत की अज्ञात घाटियों में घूमओदार रास्तो पर की गयी कठिन यात्राओं का उल्लेख मिलता है।

निकोलस रोएरिच जो एक प्रसिद्ध रुसी चित्रकार लेखक पुरातत्वविद और रहस्यवादी थे जिन्होंने 1920 के दसक में शम्भाला की खोज के लिए एक अभियान का न्रेतत्व किया था। उनकी यात्रा और अनुभव ने शम्भाला के रहस्य और इसके धार्मिक व आध्यात्मिक महत्त्व को और अधिक गहराई से उजागर किया।

निकोलस रोएरिच के शम्भाला की खोज का अभियान सन 1925 से 1928 तक चला। इस अभियान का उद्देश्य इस रहस्मयी शम्भाला को खोजना था। जिसे विभिन्न धर्मो में एक दिव्य और पवित्र स्थान के रूप में माना गया है। उन्होंने तिब्बत के गहरे और दुर्गम इलाको की यात्रा की जो हिमालय के पार बसा था। 

निकोलस रोएरिच अपना अनुभव बताते हुए कहते है – शम्भाला एक ऐसी नगरी जिसका अस्तित्व केवल कल्पनाओ में नहीं है बल्कि यह एक वास्तविकता है जो हमसे कही गहरे छिपी हुई है। जब मैं इसकी खोज करते करते हिमालय की ऊंची चोटियों से गुजर रहा था तो मैंने महसूस किया की इस नगरी का रहस्य केवल भौतिक रूप में नहीं है बल्कि  यह एक आध्यात्मिक मार्ग है शम्भाला को खोजना आसान नहीं है। यह केवल उन लोगो के लिए खुलता है जिनका ह्रदय शुद्ध और जिनकी चेतना आध्यात्मिक रूप विकसित हो चुकी है।  

Nicholas Roerich

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